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ताज उतारो, जोकर... अमेरिका से यूरोप तक ट्रंप के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा, 'No Kings' के लगे नारे

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Mar 29, 2026 09:30 am IST,  Updated : Mar 29, 2026 09:37 am IST

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अमेरिका के सभी 50 राज्यों और यूरोप के कई हिस्सों में ‘नो किंग्स’ रैलियों का आयोजन किया गया, जिसमें भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई। प्रदर्शनकारियों ने "ताज नीचे रखो, जोकर" जैसे नारों के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

शनिवार को वाशिंगटन में 'नो किंग्स' विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल के सामन- India TV Hindi
शनिवार को वाशिंगटन में 'नो किंग्स' विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल के सामने रैली की। Image Source : PTI

ईरान युद्ध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाइयों के विरोध में शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों और यूरोप के कई हिस्सों में 'नो किंग्स' रैलियों में भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, लोग कई मुद्दों पर अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए इकट्ठा हुए। 

प्रदर्शनकारियों ने "ताज नीचे रखो, जोकर" (Put down the crown, clown) जैसे नारों के साथ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। इन प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र मिनेसोटा रहा, जहां सेंट पॉल में स्थित कैपिटल लॉन में हजारों की भीड़ जुटी।

3,100 से अधिक कार्यक्रम का आयोजन

सेंट पॉल में आयोजित मुख्य रैली में रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने शिरकत की। उन्होंने संघीय एजेंटों द्वारा मारे गए रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की याद में लिखे गीत "स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस" की प्रस्तुति दी। स्प्रिंगस्टीन के अलावा अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो, जेन फोंडा, गायिका जोआन बैज और सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी रैली को संबोधित किया।

अमेरिका के न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों से लेकर ड्रिग्स जैसे छोटे कस्बों तक, लगभग 3,100 से अधिक कार्यक्रम दर्ज किए गए। अधिकांश सभाएं शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन लॉस एंजिल्स में झड़पें हुईं, जहां कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा संघीय हिरासत केंद्र के पास वस्तुएं फेंकने के बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने बताया कि जब लोगों ने तितर-बितर होने से इंकार कर दिया तो गिरफ्तारियां की गईं। वाशिंगटन डीसी में, सैकड़ों लोग लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च करते हुए गए, उनके हाथों में "ताज उतारो, मसखरा" लिखे बैनर थे और वे "कोई राजा नहीं" के नारे लगा रहे थे।

रिपब्लिकन नेताओं ने की रैलियों की आलोचना

इन रैलियों की रिपब्लिकन नेताओं ने कड़ी आलोचना की। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन्हें वामपंथी फंडिंग नेटवर्क का काम बताकर खारिज कर दिया और कहा कि इन्हें जनता का कोई वास्तविक समर्थन नहीं है। जैक्सन ने एक बयान में कहा, "इन ट्रंप विरोधी प्रदर्शनों में दिलचस्पी सिर्फ उन पत्रकारों को है जिन्हें इन्हें कवर करने के लिए पैसे दिए जाते हैं।"

नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेस कमेटी ने भी इन विरोध प्रदर्शनों की आलोचना की। एनआरसीसी की प्रवक्ता मौरीन ओ'टूल ने कहा, "ये अमेरिका विरोधी रैलियां वो जगह हैं जहां धुर वामपंथियों की सबसे हिंसक, विक्षिप्त कल्पनाओं को मंच मिलता है।" ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं थे। कई देशों में प्रदर्शन हुए। 

रोम में, भीड़ ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आलोचना करते हुए और ईरान से जुड़ी हालिया सैन्य कार्रवाइयों का विरोध करते हुए मार्च किया। लंदन में, लोगों ने "धुर दक्षिणपंथ को रोको" और "नस्लवाद के खिलाफ खड़े हो जाओ" लिखे बैनर लिए हुए थे। पेरिस में, विदेशों में रहने वाले अमेरिकियों सहित सैकड़ों लोग बैस्टिल में इकट्ठा हुए।

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